जूठ बोलने का सबसे बड़ा नुकशान जान लो | Hindi Story

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एक बार एक ग्वाला था और वो रोजाना जंगल में गाये चराने जाता था उसे हर बात में जूठ बोले की आदत थी जिस से उस की बात पर कोई भी यकीं नहीं करता था.

एक दिन वो जंगल में गाये चरा रहा था अचानक से वो चिलाने लगा बचाव – बचाव शेर मुझे खा जाये गा बचाव – बचाव शेर मुझे खा जाये गा बचाव – बचाव शेर मुझे खा जाये गा बचाव – बचाव शेर मुझे खा जाये गा आवाज सुन कर सारे के सारे गाव वाले इकठा हो गये.

फिर वो जोर जोर के हसने लगा और बोला मेने तुम सब को उल्लू बनाया है हां हां हां हां तो सारे के सारे गाव वाले चले गये ये कह कर की ये बहुत जूठा है ये कुच्छ भी जूठ बोल सकता है.

फिर कुच्छ दिनों के बाद फिर से उसी ग्वाले की आवाज आई बचाव – बचाव शेर मुझे खा जाये गा बचाव – बचाव शेर मुझे खा जाये गा बचाव – बचाव शेर मुझे खा जाये गा बचाव – बचाव शेर मुझे खा जाये गा लेकिन कोई भी गाव वाला नहीं गया.

अचानक से आवाज आना बंद हो गया कुच्छ देर बाद एक गाव वाले ने देखा की ग्वाला मारा पड़ा है.

कहानी से क्या शीक्षा मिली?

इसी कहानी से हमे शिक्षा मिलती है की हमे कभी भी जूठ नहीं बोलना चाहिए नहीं तो कोई भी हमारी सच बात को भी जूठा माने गा.

आशा करते है आपको जानकारी बहुत पसंद आई है एसी ही हिन्दी कहानिया पढने के लिए  हमारे साथ बने रहिये गा हम आपके लिय hindi story लाते रहते है धन्यवाद!

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